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जमीन या मकान खरीदते समय जरूरी कानूनी जांच और सावधानियां

Published on 2025-03-05
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6 min estimated read
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By एडवोकेट अनिल कुमार गुप्ता का चैंबर
अचल संपत्ति की खरीद में धोखाधड़ी से बचने के लिए मूल दस्तावेजों की जांच, खतौनी-खसरा का मिलान, भारमुक्त प्रमाण पत्र और रजिस्ट्री के महत्वपूर्ण नियम।

भूमि व संपत्ति खरीद में कानूनी जांच क्यों आवश्यक है?

भूमि या मकान की खरीद किसी भी परिवार या व्यवसायी के जीवन का बड़ा वित्तीय निर्णय होता है। लेकिन अक्सर केवल मौखिक वादों या अपूर्ण कागजातों पर भरोसा करने के कारण लोग लंबे कानूनी विवादों और मुकदमों में फंस जाते हैं।

एक बार त्रुटिपूर्ण रजिस्ट्री हो जाने के बाद उसे सुधारने या पैसे वापस पाने में वर्षों लग सकते हैं। इसलिए बयाना (Advance) देने से पूर्व कानूनी जांच (Due Diligence) करवाना अनिवार्य है।

रजिस्ट्री से पहले इन दस्तावेजों की जांच अवश्य करें

1. 30 वर्षों का मालिकाना दस्तावेज (Chain Deeds): विक्रेता के पास यह जमीन कैसे आई (क्रय से, वसीयत से या पैतृक बंटवारे से)? इसके पुराने सभी बैनामे जांचें।

2. राजस्व अभिलेख (खसरा और खतौनी): ग्रामीण या कृषि भूमि के मामले में सरकारी राजस्व रिकॉर्ड में विक्रेता का नाम दर्ज होना और क्षेत्रफल का मिलान होना आवश्यक है।

3. दाखिल-खारिज (Mutation): केवल रजिस्ट्री होना पर्याप्त नहीं है, राजस्व रिकॉर्ड में विक्रेता का नाम दाखिल-खारिज होना चाहिए।

4. भारमुक्त प्रमाण पत्र (Encumbrance Certificate): सब-रजिस्ट्रार कार्यालय से यह जांच लें कि संपत्ति पर किसी बैंक का लोन या कोई कोर्ट का स्टे तो नहीं है।

5. पैतृक संपत्ति में सह-खातेदारों की सहमति: यदि जमीन पैतृक है, तो यह सुनिश्चित करें कि अन्य वारिसों या हिस्सेदारों का कोई अनसुलझा विवाद न हो।

Statutory References & Acts

  • संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882
  • पंजीकरण अधिनियम, 1908
  • राज्य भू-राजस्व संहिता
Keywords:#जमीन रजिस्ट्री#मालिकाना हक#खतौनी#दाखिल-खारिज#भारमुक्त प्रमाण पत्र
Important Disclaimer: This article is published for educational purposes only and reflects general statutory principles under Indian law. It should not be treated as a legal opinion or formal legal advice. Individual cases depend heavily on specific documentary evidence and dates of cause of action.

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